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भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई
आईना देखें तो चेहरे नज़र आते हैं कई
जो ये कहे कि रेख़्ता क्यूँके हो रश्क-ए-फ़ारसी
गुफ़्ता-ए-‘ग़ालिब’ एक बार पढ़ के उसे सुना कि यूँ
जिसमें तुम नहीं, ख्वाहिश मेरी अधूरी है,
जिस दिन तुम मिल गए महादेव, ये जिंदगी मेरी पूरी है!
शिकवा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब से तो कहीं बेहतर था
अपने हिस्से की कोई शम्अ' जलाते जाते
न मुझे किसी का दिल चाहिए,
न मुझे जमाने से कोई आस है,
जो अपनी गर्लफ्रेंड की पप्पी दिलवा दे,
मुझे बस ऐसे दोस्त की तलाश है।
More Shayari
Motivational Shayari

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए।
~ अल्लामा इक़बाल
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज,
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं।

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए।
~ अल्लामा इक़बाल
जब लोग तुम्हारे खिलाफ बोलने लगें,
तो समझ लो कि तुम सफलता की राह पर आगे बढ़ रहे हो।

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए।
~ अल्लामा इक़बाल
मैं ने हर तख़रीब में देखी है इक ता’मीर भी,
मेरा मिट जाना भी है हिम्मत-फ़ज़ा मेरे लिए।

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए।
~ अल्लामा इक़बाल
क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए
उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम
Festival Shayari

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर ~ Mushafi Ghulam Hamdani

'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
~ Couplets of Jamiluddin Ali
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार ~ Couplets of Jamiluddin Ali

कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार
घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार
कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार
घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार
~ Bhagwan Das Ijaz
कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार ~ Bhagwan Das Ijaz

जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
~ अज्ञात
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली ~ अज्ञात

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर ~ Mushafi Ghulam Hamdani

तुम्हारी तो दिवाली है,
लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!!
तुम्हारी तो दिवाली है,
लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!!
~ अज्ञात
तुम्हारी तो दिवाली है, लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!! ~ अज्ञात

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर

'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
~ Couplets of Jamiluddin Ali
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार

जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
~ अज्ञात
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
यहाँ पढ़ें खुशियों से भरी शायरी, जो आपके दिल को छू जाएगी और चेहरे पर मुस्कान लाएगी।

डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़े
सय्याद की निगाह सू-ए-आशियाँ नहीं
~ Momin Khan Momin
डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़े सय्याद की निगाह सू-ए-आशियाँ नहीं
ख्वाबो क बिछौना, खुशियों का चादर हो, दूआओ का आसमां, प्यार का सागर हो, जन्मदिन पर आपके है यही दुआ खुदा से, कि हर कहीं आपकी चर्चा, आपका आदर हो।
क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर, जाने क्या हस्र होगा जब वो खुलकर मुस्कुरायेंगे…….!!!
Funny Shayari
अकबर इलाहाबादी

इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम
वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया
~ अकबर इलाहाबादी

हर चीज़ “हद” में अच्छी लगती हैं,
मगर तुम हो के “बे-हद” अच्छे लगते हो……!!!
~ अज्ञात
हर चीज़ “हद” में अच्छी लगती हैं, मगर तुम हो के “बे-हद” अच्छे लगते हो……!!!

हमारे आंसूं पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं,
उनकी इस अदा से वो दिल को चुराते हैं,
हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को,
इसी उम्मीद में हम खुद को रुलाते हैं…….!!!
~ अज्ञात
हमारे आंसूं पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं, उनकी इस अदा से वो दिल को चुराते हैं, हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को, इसी उम्मीद में हम खुद को रुलाते हैं…….!!!

यूँ तो बहुत से हैं रास्तें, मुझ तक पहुंचने के,
राह-ऐ-मोहब्बत से आना, फासला कम पड़ेगा……!!!
~ अज्ञात
यूँ तो बहुत से हैं रास्तें, मुझ तक पहुंचने के, राह-ऐ-मोहब्बत से आना, फासला कम पड़ेगा……!!!

दिल से उठता है सुब्ह-ओ-शाम धुआँ
कोई रहता है इस मकाँ में अभी
~ अंजुम रूमानी
दिल से उठता है सुब्ह-ओ-शाम धुआँ कोई रहता है इस मकाँ में अभी

अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे,
हर खवाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को,
जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे……..!!!
~ अज्ञात
अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर खवाब मे बुलाया है तुझे, क्यू न करे याद तुझ को, जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे……..!!!
अज्ञात
“दिल के हर कोने में बस तुम्हारी यादें हैं, जिन्हें अब कोई नहीं छू सकता।”
View Shayariअज्ञात
होते ही शाम, जलने लगा, याद का अलाव आँसू सुनाने दुख की कहानी निकल पड़े।
View Shayariमोहम्मद अली ख़ाँ रश्की
दर्द-ए-दिल क्या बयाँ करूँ ‘रश्की’ उस को कब ए’तिबार आता है
View Shayariअज्ञात
जिंदगी ने हर मोड़ पर हमें आजमाया है, कभी दर्द दिया, तो कभी सब्र का फल चखाया है।
View Shayariअज्ञात
“तुम्हारे बिना ये दिल अब वीरान हो गया है, जैसे हर ख़ुशी मुझसे दूर हो गई।”
View ShayariFiraq Gorakhpuri
बे-ख़ुदी में इक ख़लिश सी भी न हो ऐसा नहीं तू न आए याद लेकिन मैं तुझे भूला नहीं
View Shayariहांथ पैरपै मुंहमुं नाक से ले कर दादा दादी चाचा चाची बहन भाई रोना हंसहं ना तक सिखाती है।है
वो एक मां हीं है जो अपने बच्चेको एक गुरु के लायक बनाती है।।है
~ अज्ञातये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ
इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
~ Munawwar Ranaबेवफा के जाल में, फंसा रह गया मेरा दिल,
बेवफा के जाल में, फंसा रह गया मेरा दिल, उसकी यादों में, आज भी हर पल है मुश्किल।
अज्ञातना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं, तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं, वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी, हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं।
अज्ञातकटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी
कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी कैसे कहूं किसी की तमन्ना न चाहिए
शाद आरफ़ीमजनू अब इश्क़ करे तो कैसे करे
मजनू अब इश्क़ करे तो कैसे करे लैला अब ऐतबार के काबिल न रही”
अज्ञाततेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी, बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी…!!
अज्ञातबेवफा तेरी यादों का सिलसिला अब भी है,
बेवफा तेरी यादों का सिलसिला अब भी है, तू नहीं, पर तेरा धोखा मेरे दिल में अब भी है।
अज्ञातएक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है मैंने हर करवट सोने की कोशिश की
गुलज़ारबेवफाई का आलम ये है कि अब तेरी यादें भी दर्द देती हैं,
बेवफाई का आलम ये है कि अब तेरी यादें भी दर्द देती हैं, तेरे जाने के बाद हर खुशी अधूरी लगती है।
अज्ञात
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